राजकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में साइबर हाइजीन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों के नए तरीकों और बचाव के उपायों की दी जानकारी
बीकानेर,मारवाङ अलख। 10 अक्टूबर। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा माह अक्टूबर-2026 के तहत राजकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, बीकानेर में शुक्रवार को ‘बिल्ड ए कल्चर ऑफ साइबर हाइजीन’ थीम पर साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप तथा उनसे बचाव के प्रभावी उपायों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा, महाविद्यालय के प्राचार्य बाबूलाल बिकोनिया, सहायक निदेशक प्रशांत जोशी तथा प्रथम वर्ष के प्रभारी अधिकारी डॉ. आलोक व्यास ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम समन्वयक प्रशांत जोशी ने सी-डैक (CDAC), हैदराबाद के ‘इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी अवेयरनेस एजुकेशन प्रोजेक्ट’ की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
साइबर अपराध राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती : कच्छावा
महाविद्यालय के प्राचार्य बाबूलाल बिकोनिया ने स्वागत उद्बोधन में पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा द्वारा स्मार्ट पुलिसिंग के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने नशे के विरुद्ध संचालित ‘ऑपरेशन नीलकंठ’ के सामाजिक प्रभावों का उल्लेख करते हुए युवाओं को फिटनेस के प्रति प्रेरित करने में उनकी भूमिका को भी रेखांकित किया।
मुख्य वक्ता पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने साइबर अपराधों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौती बताते हुए विद्यार्थियों को इनके विभिन्न स्वरूपों और कार्यप्रणाली से अवगत कराया। उन्होंने एनसीआरबी के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए साइबर अपराधों के मामलों तथा उनसे होने वाले आर्थिक नुकसान में वृद्धि की जानकारी दी।
उन्होंने डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश एवं टास्क फ्रॉड, यूपीआई और क्यूआर कोड के जरिए धोखाधड़ी, फर्जी केवाईसी, कस्टमर केयर फ्रॉड तथा फर्जी एपीके फाइलों के माध्यम से होने वाले साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से समझाया।
डीपफेक और एआई आधारित धोखाधड़ी से सतर्क रहने की सलाह
पुलिस अधीक्षक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के बीच डीपफेक, ऑडियो क्लोनिंग और वीडियो कॉल के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी के प्रति भी विद्यार्थियों को सचेत किया। उन्होंने मजबूत पासवर्ड रखने, टू-स्टेप वेरिफिकेशन अपनाने, मोबाइल एवं अन्य डिजिटल उपकरणों के सॉफ्टवेयर नियमित रूप से अपडेट करने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि किसी के साथ भी ओटीपी साझा नहीं करना चाहिए तथा बैंकिंग संबंधी कार्यों के लिए सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करने से बचना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहते हुए ‘रुको, सोचो और एक्शन लो’ का मंत्र अपनाने का आह्वान किया।
कच्छावा ने बताया कि वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने समय पर शिकायत करने के महत्व को रेखांकित करते हुए शुरुआती घंटों में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता बताई।
विद्यार्थियों को दिलाई डिजिटल सुरक्षा की प्रतिज्ञा
कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य बाबूलाल बिकोनिया ने विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को भारत सरकार द्वारा जारी ‘डिजिटल डिवाइस और डेटा सुरक्षा प्रतिज्ञा’ दिलाई। कार्यक्रम समन्वयक प्रशांत जोशी ने साइबर जागरूकता पर आधारित त्वरित प्रतियोगिता आयोजित की। प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थी को पुरस्कार स्वरूप बैग प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन कमलप्रीत कौर ने किया। अंत में प्रथम वर्ष के प्रभारी अधिकारी डॉ. आलोक व्यास ने अतिथियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ प्रवक्तागण डॉ. एस.एल. प्रजापत, डॉ. वी.एस. ताखर, महिपाल खेदर, राजेंद्र अलारिया, मंजू कुमारी, किरण कुमारी, मिताश्री, बालूराम, सवाई सिंह और अरुण कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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